Monika garg

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लेखनी प्रतियोगिता -18-May-2022#काली नजर

बात बहुत पुरानी है पर लगती नही है कि पुरानी है। मैंने काले जादू और काली नजर को साक्षात महसूस किया है।आप सब बताईएगा क्या एक ही परिवार मे कोई अपने पर भी काला जादू करवा सकता है।पर ये मैने महसूस किया था।
बात तब की है जब मै पहली बार मां बनने वाली थी।शादी के तीन महीने बाद मुझे प्रेग्नेंसी हुई थी।मै बहुत खुश थी मां बनने का अहसास एक अलग ही तरह का होता है। मुझे याद है मेरी शादी हुई थी तब मेरे पतिदेव की मौसी जी शादी के बाद कुछ दिन ठहर कर गयी थी उनकी बहू को बच्चे नही होते थे ।वो जब मै दुल्हन बन कर आयी तभी से मेरी सास को कहती थी ,"ले बहने। तेरे घर तो अब बच्चे खेलने लगेंगे। हमारी वाली ने तो जैसे कसम खा रखी है एक पत्थर भी नही जने गी वो।"वो जब भी मुझे देखती ऐसे ही मन ही मन कुढती रहती थी।मेरी सास भी उसकी हां मे हां मिलकर कहती,"इसका क्या पता चल गया ।ये क्या जनेगी।"दस दिन बाद मौसी जी चली गयी ।मै भी अपने मायके फेरा लगाने चली गयी। थोड़े दिनों बाद ही मै प्रेगनेंट हो गयी।उसके थोड़े दिनों बाद ही मौसी जी फिर से पधार गयी।अब की बार लग रहा था जैसे काफी दिन ठहरने आयी हैं।मै जब अपने कमरे से किचेन में जाती तो वो मुझे देखकर किलसती रहती थी ।ये बात मैने कयी बार नोटिस की थी। ऐसे लगता था जैसे वो अपनी काली नजर मुझ पर डाल कर इस बच्चे को कुछ करना चाहती थी।एक गर्मी की दोपहरी मे सभी सो रहे थे ।मै भी सो गयी। थोड़ी देर बाद मेरे पतिदेव ने चाय मांगी तो मै किचेन मे चाय बनाने चली गयी मेरा मुंह गैस की तरफ था और किचेन मे अंदर आने का रास्ता मेरी पीठ पीछे था ।मतलब कोई मेरे पीछे अगर चुपचाप आकर खड़ा हो जाएं तो मुझे दिखाई नही देता था।मै जब चाय बना रही थी तो मुझे ऐसे लगा जैसे मेरे पीछे कोई खड़ा है । मैंने जैसे  ही पीछे मुड़कर देखा मेरी सास मुझ पर से कुछ वार रही थी ।शायद कागज मे कुछ था।मै एकदम से घबरा गयी और पूछने लगी,"मम्मी जी आप ये क्या कर रहे हो।" मेरी सास मुझे डांटते हुए बोली,"चुप बैठ।"और वो कागज का सामना लेकर बाहर चबूतरे पर चली गयी । मैंने बाहर झांक कर देखा तो क्या देखती हूं,"मेरी सास और मेरी मौसी सास ने एक तांत्रिक को बैठा रखा था।वो उनसे मेरे ऊपर कुछ करवाने की बात कर रही थी।मै घबराहट के मारे पतिदेव के पास भागी उनको जगाकर सारी बात बताई मेरे पतिदेव नास्तिक है वे इन बातों मे विश्वास नही करते और मुझे भी यही कहा,"तुम शांत रहो ।कुछ नही होगा तुम्हें।"
मुझे पांचवां महीना चल रहा था तब थोड़े दिनों मे मौसी जी मुस्कुराते हुए अपने घर चली गयी। मुझे छठे महीने से ही को
कमपलीकेशन होने लगे ।मरी तबीयत खराब रहने लगी। सातवां महीना खत्म होते होते मेरा बच्चा पेट मे ही सूख गया।और आंठवे महीने मे पेट मे ही मर गया।मै रोती रही भगवान को कोसती रही कि तूने मां बनने का सुख देकर भी मुझ से छीन लिया।मै अस्पताल से घर आ गयी।सारा दिन अपने कमरे मे पड़ी रोती रहती थी।सास सारा घर का काम मुझ से करवाती थी और जब पतिदेव के पास जाकर सहानुभूति पाना चाहती तो मुझे कहती,"हाय कैसी है छिलला फाड़ कर (मतलब जचचगी खत्म नही हुई है)जाएगी खसम के पास तुझे शर्म नही आती।"
मै भी सोचती किस बात का छिलला।काम तो सारे घर का करवाती हो और मै अभी जच्चा हूं। मुझे ऐसे लगता था जैसे मेरी सास का भी कोई हाथ था उस जादू टोना करने मे।
थोड़े दिनों बाद पता चला मौसी सास की बहू प्रेगनेंट है तीसरा महीना चल रहा है।मुझे ये पक्का यकीन हो गया जिस बहू को सालों से बच्चे नही होते थे वो अचानक से मां बन गयी।जरूर मेरी सास और मेरी मौसी सास ने मुझ पर काला जादू किया होगा ।जो मेरा बच्चा मर गया और वो सालों से बांझ प्रेगनेंट हो गयी।जो होना था वो हो गया पर भगवान ने भी सोचा कि इसके साथ(मेरे साथ) बुरा हुआ है ।तभी उस घटना के बाद दो लाल मेरी झोली मे डाल दिए।कहते है भले का मुंह उजला ,बुरे का मुंह काला।मै आज भी उन मौसी सास को याद करती हूं तो सिहर जाती हूं।उनकी काली नजर हमारे परिवार को लगी थी।

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10 Comments

Seema Priyadarshini sahay

19-May-2022 05:50 PM

बेहतरीन भाग

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Punam verma

19-May-2022 01:08 PM

Nice

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Muskan khan

19-May-2022 11:43 AM

Very nice

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